लैलूंगा,जिला-रायगढ़
विधा-छंद मुक्त( श्रावण मास पर आधारित)
शीर्षक- दस्तक दी जो सावन ने
आज फिर झूमने लगा मन मतवाला
छा गई हो जैसे एक नई उमंग
दस्तक दी जो सावन ने
सावन ने मनभावन ने
दूर तलक खेतों में हरियाली छाई
किसानों के उदास चेहरे पर मुस्कान ले के आई
चिड़ियों की चहचहाहट, कानो में रस घोल गई
सौंधी-सौंधी मिट्टी की खुशबू घर -आँगन को महका गई
सावन में भोले बाबा की सबको याद है आई
विपदाओं से घिरे लोगों पर बाबा ने कृपादृष्टि बरसाई
बहनों के आंखों में मायके की याद समाई
भाई की कलाई में राखी बांधने की ख्वाब मन मे संजोई
रिमझिम बरसते सावन में पिया की याद है आई
इस मधु मास में मिलन की सपने मन में सजाई
हरी-हरी चूड़ियों से अपने हाथों को सजाए
बैठी है आज इंतजार में नज़र घड़ी पे टिकाए
आज फिर झूमने लगा मन मतवाला
छा गई हो जैसे एक नई उमंग
दस्तक दी जो सावन ने
सावन ने मनभावन ने।
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