Saturday, July 11, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- मानव का विकास

नाम----गिरधारी लाल चौहान
स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता 
शीर्षक -- मानव का विकास
व्याख्या -कवि के द्वारा   मानव के विकास एवं सुविधाओं का  वर्णन किया गया है । मानव पहले कैसे था और आज कैसा किन मूल्यों को स्थापित करके चल रहा है ।
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              मानव का विकास
मानव का विकास हुआ है  ,प्रत्यक्ष दिख रहा ।
पंख से लिखने वाला , मशीन से लिख रहा ।

जमीन में अब उसके,
पैर नहीं पड़ते ।
प्रचुर उत्पादन करता अन्न का,
भूख नहीं मरते ।
नदी नाव पैदल चलने वाला,
दो पहिया चार पहिया में चलते।
रहने को घर नहीं था, वातानुकूलित में रह रहा ।

शिक्षा रोजगार थे नहीं,
आज विद्यालय और कारखाने हैं ।
सबको शिक्षा सबको काम ।
ये आधुनिकता के निशाने है ।
जगह जगह विद्यालय कारखाने जहां नवीन मूल्यों को सीख रहा ।

उत्तम स्वास्थ्य आवागमन के,
क्षेत्र में भी विस्तार हुआ ।
सड़क, रेल, वायु, जल पोत,
रेडियो, टेलीविजन ,समाचार सब पर विचार हुआ ।
राजनीति में प्रजातंत्र  की जड़ खूब फल-फूल रहा ।

कर्म ,धर्म ,विचार ,संस्कृति ,संस्कार,
सभ्यता भी लोगों ने अपनाये है ।
योग ,प्राणायाम ,आसन भी,
जीवन में चमत्कार लाये है ।
सूर,कबीर तुलसी,मीरा ,रसखान का भाव जीवन में दिख रहा ।

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