जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ़
विधा---कविता (सायली विधा पर सृजन)
शीर्षक --- नदी
व्याख्या ---कवि के द्वारा नदी का गीत गाते हुए बहना उसके गीत का आसमान धरा वृक्ष पर प्रभाव एवं मानव जीवन की तरह अन्तिम होने का वर्णन किया गया है ।
नदी
इक
नदी जब
गीत गाती है
गा उठते
आसमान ।
धरती
धीरे-धीरे
सुनती है संगीत
बसा लेती
आत्मा ।
नयन
खुल उठते
चलती हवाओं के
ध्यान मग्न
होते ।
किनारे
लगे सभी
पेड़ मचल उठते
चुपचाप हो
सुनते ।
जल
पर जो
शब्द होते है
लगते लय
सा ।
कहीं
उसकी तेज
बहाव है रहता
मिलाते ताल
सा ।
जिसने
उसके स्वप्न
को है सुना
स्वप्न भूलते
नहीं ।
जाकर
सागर में
वह मिलती है
फिर नहीं
मिलते ।
जीवन
भी उसी
तरह अपना है
बचपन से
चलती ।
आते
ही बुढ़ापा
नदी की तरह
भव सागर
समाती ।
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