जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- नदी
विधा- सायली छंद
नदी
अविरल प्रवाह
प्रेरित करता सतत्
बढ़ने को
आगे।
कठिनाइयां
लांघ निरंतर
प्रवाहित होती जलधाराएं
नूतन छंद
रचाती।
झाड़ियों
और चट्टानों
को काट-काटकर
नया इतिहास
गढ़ती।
कभी
धीरे-धीरे
फिर हौले -हौले
रत्नाकर में
समाती।
निर्झरणी
नव छंद
कल -कल कर
संगीत की
रचती।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
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