जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---अलख हरि की माया पर आधारित कविता
शीर्षक---वो बन्दे भूल मत
व्याख्या--कवि के द्वारा सांसारिक संरचना में ईश्वर को नहीं भूला ने हेतु सावधान किया गया है ।
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वो बन्दे भूल मत
अलख हरि की माया, कहीं धूप कहीं छाया ।
वो बन्दे भूल मत ,....नाशवान मिली काया ।
वही एक दाता,
वही पिता माता ।
उसकी शरण में,
हर कोई जाता।
ले जायेगा तुझे , वही तुझे यहां लाया ।
लेखा उसके हाथ,
लिखता सबका ही भाग ।
उसके इशारे में ,
सुख और दुख का विभाग ।
तेरे कर कुछ नहीं, वैसा उसनेे रचाया ।
माया वश सब फिरे,
धन जन यौवन से घिरे ।
जान तुझे सब खिचे,
लोभ से सब चलें पिछे ।
हालत सबका एक, सोचा उसने बनाया।
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