नाम-पुष्पेन्द्र शुक्ला पुष्पराज
जिला- जशपुर छत्तीसगढ़
विषय-**अनमोल समय नहीं खोना है **
पल-पल बीते,वक्त हमारा,
उम्र बढे,जीवन घटे हमारा।
धड़कन बोले,नहिं सोना है,
अनमोल समय नहीं खोना है ।।
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जिनको कल खेलते देखा,
अपने आंगन में उछलते देखा।
बेटी बिछड़े तो फिर रोना है,
अनमोल समय नहीं खोना है ।।
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बिन लक्ष्य के जो हैं भटकते,
टुटे पुल में जैसे लटकते ।
गलतियों को जरा,बारिशों से धोना है,
अनमोल समय नहीं खोना है ।।
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चार पल रूपी चार आश्रम है,
जियो खुशी से,ये आरोही क्रम है ।
हर पल का अपना मजा होना है,
अनमोल समय नहीं खोना है ।।
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पुष्पेन्द्र शुक्ला "पुष्पराज"
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