Tuesday, July 28, 2020

कलकत्ता पश्चिम बंगाल से कवयित्री चंदा प्रह्लादका जी की गजल

कवियित्री -चंदा प्रहलादका
शहर -कलकत्ता 
Salt Lake City
ग़ज़ल 

ग़म  को  जीवन  से  यूँ मिटाना होगा,
जीत का जश्न अब तो मनाना होगा ।
दाँव उलट ही गया,शौक़ करूँ तो क्या ,
एक   बार   फिर से   आज़माना होगा ।

राह टिकी,बुनियाद काँटों की तो क्या ,
सोई  क़िस्मत   को  भी जगाना  होगा।
दर्द पलक में अश्क बन छलके तो क्या,
तसब्बुर  में  प्यार  का   ख़ज़ाना होगा।

लड़खड़ाते  कदम,जो  पी गये तो क्या ,
जाम   नज़रों   का  वो   पैमाना होगा ।
रूह   तुममें  समा जाये  नशा तो क्या,
तुमको   तुमसे   ही  अब चुराना होगा ।

दास्ताँ प्यार की दिल छुपा रखे तो क्या,
बागे   जन्नत   को   भूल   जाना होगा ।
इज़हारे  इश्क़  ज़ुबां ख़ामोश तो क्या ,
मासूम   इशारों   से   जताना   होगा ।

अजीयत दिल की तड़प बन गई तो क्या,
अरमां   ख़ाक   में  मिले   बचाना होगा ।
सजदा हो यकी को जमीं मिली तो क्या ,
मेरे   हमसफ़र  हसीं   ठिकाना    होगा ।

चंदा प्रहलादका
कलकत्ता

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