Tuesday, July 7, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- भुइंया के भगवान

कवयित्री-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर (छग)
शीर्षक-भुइयां के भगवान

आषाढ़ होवय या चौमास रहे,
 सूत उठ बिहनिया खेत म जाथै।

मोर गांव के वो नंगरिया किसान,
तीपत भोंभरा म पसीना बोहाथे।

बासी ,पेज  नून-चटनी  ल खाके, 
खुमरी ओढ़े  मुड़ी म पागा बांधे।

नांगर बैला जोते अर्र तता बोले,
जांगर तोड़ अब्बड़ बूता करथे।

सोनहा बाली अऊ अन्न उपजाथे,
तभे भुइयां के भगवान कहलाथे।

धरती दाई के मयारु कोरा ल,
अब्बड़ सुग्घर वो हा संवराथे।

आनी -बानी के भाजी पाना इहां,
जिमिकांदा, खेड़ा,पताल उपजाथे

भुइयां के भगवान ये किसनहा हे,
भुइयां धान के कटोरा कहलाथे।।

*मीरा आर्ची चौहान*
    *कांकेर,छग*

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