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राजनैतिक संरक्षण बढ़ाता , अपराध बहुत भारी ।
कानपुर में बलिदान दी है , पुलिसबल ने हमारी ।।
गुण्डों को है पनाह देते , राजनेता हमारे ,
जिनके आश्रय से अपराधी , बन जाते हत्यारे ।
कानून को हाथ में लेते , रौब दिखाते भारी ।।
कानपुर में बलिदान दी है , पुलिसबल ने हमारी ।।१
नेताओं की समीपता में , घमण्ड उसको छाये ,
सातवें आसमान लाँघता , मन उसका बढ़ जाये ।
प्रवेशकर अपराध जगत में , बना है अहंकारी ।।
कानपुर में बलिदान दी है , पुलिसबल ने हमारी ।।२
पुलिस प्रशासन भी दे देते , अगर उसको सहारा ,
गुनाह उसका बढ़ता जाता , चढ़ते रहता पारा ।
खुद को वह बादशाह माने , करता गुनाह सारी ।।
कानपुर में बलिदान दी है , पुलिसबल ने हमारी ।।३
मन भी सदैव अपराधी का , बेलगाम हो जाता ,
हथियारों का बड़ा जखीरा , घर में सदा बढ़ाता ।
किलेनुमा घर बनवाता है , चाकचौबंद सारी ।।
कानपुर में बलिदान दी है , पुलिसबल ने हमारी ।।४
अस्त्र-शस्त्र वह लाके उसमें , चुपके से भर लेता ,
दीवार में घातक अस्त्र को , लाके चिनवा देता ।
भारी गोपनीय होती है , उसकी यह तैयारी ।।
कानपुर में बलिदान दी है , पुलिसबल ने हमारी ।।५
कानपुर में विकास दुबे ने , जो करके दिखलाया ,
नेता-अफसर की 'ठाकुर' है , भूल सामने आया ।
आठ-आठ पुलिसबलों ने है , दिया शहादत भारी ।।
कानपुर में बलिदान दी है , पुलिसबल ने हमारी ।।६
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स्थान-सारंगढ़--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
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