Tuesday, July 7, 2020

रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- दु:खद बलिदान

---<<००: कानपुर का दुःखद बलिदान :००>>---
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राजनैतिक  संरक्षण बढ़ाता , अपराध  बहुत भारी ।
कानपुर में  बलिदान  दी  है , पुलिसबल  ने हमारी ।।
गुण्डों   को   है   पनाह  देते , राजनेता        हमारे ,
जिनके आश्रय से  अपराधी , बन   जाते    हत्यारे ।
कानून   को   हाथ  में   लेते , रौब  दिखाते   भारी ।।
कानपुर में  बलिदान  दी  है , पुलिसबल  ने हमारी ।।१
नेताओं   की    समीपता  में , घमण्ड उसको छाये ,
सातवें  आसमान    लाँघता , मन उसका बढ़ जाये ।
प्रवेशकर  अपराध जगत में , बना    है   अहंकारी ।।
कानपुर में  बलिदान  दी  है , पुलिसबल  ने हमारी ।।२
पुलिस  प्रशासन भी  दे देते , अगर उसको  सहारा ,
गुनाह उसका  बढ़ता  जाता , चढ़ते   रहता   पारा ।
खुद को वह  बादशाह माने , करता  गुनाह   सारी ।।
कानपुर में  बलिदान  दी  है , पुलिसबल  ने हमारी ।।३
मन भी  सदैव अपराधी का , बेलगाम   हो   जाता ,
हथियारों का  बड़ा जखीरा , घर  में  सदा  बढ़ाता ।
किलेनुमा  घर  बनवाता  है , चाकचौबंद       सारी ।।
कानपुर में  बलिदान  दी  है , पुलिसबल  ने हमारी ।।४
अस्त्र-शस्त्र वह लाके उसमें , चुपके  से  भर   लेता ,
दीवार में  घातक  अस्त्र को , लाके   चिनवा   देता ।
भारी   गोपनीय    होती   है , उसकी   यह   तैयारी ।।
कानपुर में  बलिदान  दी  है , पुलिसबल  ने हमारी ।।५
कानपुर में  विकास  दुबे  ने , जो करके दिखलाया ,
नेता-अफसर की 'ठाकुर' है , भूल   सामने   आया ।
आठ-आठ पुलिसबलों ने है , दिया  शहादत  भारी ।।
कानपुर में  बलिदान  दी  है , पुलिसबल  ने हमारी ।।६
                         ०××××××××०
स्थान-सारंगढ़--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'

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