Tuesday, July 7, 2020

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि " की रचना- खेती

कविता _क़ृषि  पर केंद्रित  रचना 
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
              बिलासपुर  छ. ग. 
            
              
शीर्षक _खेती किसानी के दिन 

चल आगे संगी खेती  खर के दिन ह |
नगर बइला  भन्दै  के दिन ह |

जाबो अपन  खेत म बो बोन अपन खेत ल |
करबो जतन त बाबो अपन धान ल |
ये हमर दाई ददा  ये हि हर पईलिया आय |
चल  आगे संगी खेती खार  के दिन ह |
नगर बईला  भांदे  के दिन ह  |

ये धरती मैया हमर तो भगवान आय |
काँटी खुटी ल बिन बिन फेंक बोन |
समये  समये म जतन कर बोन |
चल आगे संगी खेती कर के दिन ह |
नागर बईला  भांदे के दीन ह |

माई  पिल्ला  बुता कर बोन |
एको घरी नई सुरतान  |
तभे  मिलहि मेहनत के फल |
बने रई  हि  हमर आज अउ  काल |
चल आगे संगी खेती खार  के दिन ह |
नागर बईला भांदे के दिन  ह |

अन्न धन के कर बोन जतन|
त हो हि रे उद्धार  हमर |
दीन रात मेहनत करबोन |
लईका   अउ  सियान |
चल आगे संगी खेती खार  के दिन ह |
नागर  बईला  भन्दै के  दिन ह |

हरेली के दिन पूजा कर बोन |
घर के नागर बईला  के |
चीला बनाबो अउ पूजा करबोन |
घर के खेती औजार  के |
चल आगे संगी खेती  खार के दिन ह |
नागर बईला  भन्दै  के दिन ह |

भावर्थ _क़ृषि कार्य के दिन आने पर किसान के मन के भाव इच्छा का वर्णन 

रचनाकार  -सावित्री यादव "सावि "
                बिलासपुर  छ. ग. 
                

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