कविता _क़ृषि पर केंद्रित रचना
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक _खेती किसानी के दिन
चल आगे संगी खेती खर के दिन ह |
नगर बइला भन्दै के दिन ह |
जाबो अपन खेत म बो बोन अपन खेत ल |
करबो जतन त बाबो अपन धान ल |
ये हमर दाई ददा ये हि हर पईलिया आय |
चल आगे संगी खेती खार के दिन ह |
नगर बईला भांदे के दिन ह |
ये धरती मैया हमर तो भगवान आय |
काँटी खुटी ल बिन बिन फेंक बोन |
समये समये म जतन कर बोन |
चल आगे संगी खेती कर के दिन ह |
नागर बईला भांदे के दीन ह |
माई पिल्ला बुता कर बोन |
एको घरी नई सुरतान |
तभे मिलहि मेहनत के फल |
बने रई हि हमर आज अउ काल |
चल आगे संगी खेती खार के दिन ह |
नागर बईला भांदे के दिन ह |
अन्न धन के कर बोन जतन|
त हो हि रे उद्धार हमर |
दीन रात मेहनत करबोन |
लईका अउ सियान |
चल आगे संगी खेती खार के दिन ह |
नागर बईला भन्दै के दिन ह |
हरेली के दिन पूजा कर बोन |
घर के नागर बईला के |
चीला बनाबो अउ पूजा करबोन |
घर के खेती औजार के |
चल आगे संगी खेती खार के दिन ह |
नागर बईला भन्दै के दिन ह |
भावर्थ _क़ृषि कार्य के दिन आने पर किसान के मन के भाव इच्छा का वर्णन
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
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