Monday, July 13, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी कृत आलेख- पर्यावरण एवं हरियाली

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर (छ .ग.)
विषय-पर्यावरण एवं हरियाली

  आओ हरियाली पर्व मनाएं,        
 धरा में अब हरीतिमा फैलाएं।
"पर्यावरण कोस्वच्छ बनाएं,
आओ पेड़ पौधों    लगाएं।
        
     "आधुनिकता के दौर में पर्यावरण कैसे बचाएं" एक ज्वलंत समस्या है ।ऐसे में पर्यावरण एवं हरियाली पर्व एक दूसरे के पूरक है। हरियाली अमावस्या को एक पर्व के रूप में मनाते है।आने वाले वर्ष में कृषि कैसे होगी इसका अनुमान लगाते है।इस दिन वृक्षारोपण भी करते है।इस दिन पौधा लगाना शुभ माना जाता है। कहीं-कहीं हरियाली अमावस्या को मेले का आयोजन  होता है।इस दिन मानसून ऋतु की शुभकामनाएं भी देते है।किसान अपने हल एवं कृषि यंत्रों का पूजन भी करते है।सावन की फुहारऔर खुशनुमा पर्यावरण के स्वागत के लिए हरियाली को पर्व के रूप में मनाते है।इस तरह पर्यावरण सुधार के लिए कार्य किया जाता है। आज लोग आधुनिक होने के कारण जंगलों को काट कर कच्चे मकानों के जगह पक्के कंक्रीट के मकान बना रहे है।पेड़-पौधों नदारद हो रहे है।जंगल साफ हो गया है।पर्यावरण प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल वार्मिंग है। जिसकी वजह से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। और मानव जीवन विनाश के कगार पर आ खड़ा हुआ है ।अगर पर्यावरण बचाने कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जाता है तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा ।प्रदूषण से बचने के लिए प्रकृति के सानिध्य का सोच समझकर सब लोगों को छोटे बड़े पौधे अवश्य लगाने चाहिए।धरती की हरियाली बढ़ाने को कृतसंकल्प होकर तथा पेड़ पौधों का अस्तित्व बचाने का प्रण लेकर इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।
यह समस्या किसी राष्ट्र विशेष की नहीं बल्कि विश्व की समस्या हो गई है ।औद्योगीकरण और जनसंख्या वृद्धि दोनों के कारण प्रदूषण की समस्या गंभीर हो गई है। पर्यावरण विदों का मानना है कि-" धरती को प्रदूषण मुक्त करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे ।साथ ही प्रत्येक नागरिकों को इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा।"                                          
पर्यावरण बचाने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करें तो प्रकृति की रक्षा में मदद मिलेगी ।अधिक से अधिक वृक्षारोपण न करके मात्र दस पौधे ही लगाए और समुचित देखभाल करें।
*निष्कर्ष*
     इस तरह हरियाली पर्व और  पर्यावरण संरक्षण का एक दूसरे से अटूट संबंध है।इस दिन वृक्ष लगाने की परंपरा है जो पर्यावरण की रक्षा के लिए जरूरी है।अतः पर्यावरण को संरक्षित करना हमारा सर्वप्रथम कर्तव्य  होना चाहिए।स्वच्छ पर्यावरण से स्वच्छ परिवेश होगा।

"जो पर्यावरण को नहीं बचाएंगे,
तो धरा पर हम रह ना पाएंगे।"
 
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)

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