कांकेर(छ. ग.)
विधा-छंद मुक्त(श्रावण मास पर केंद्रित)
शीर्षक-देखो सावन डाकिया आये
देखो सावन डाकिया आए,
बूंदों की वो चिट्ठियाँ लाए।
मिट्टी की सौंधी सुगंध आयी,
ऐसे धरती मंद-मंद मुस्कायी।
काली-काली घटाएं छाई,
संग अपने हरियाली लाई।
तेज पवन चली सर-सर,
नाव चलाएं बच्चे घर-घर।
छाता लेकर हर कोई घूमें,
बारिश में सब बच्चे झूमें।
देखो सावन डाकिया आए,
बूंदों की वो चिट्ठियाँ लाए।
-गरिमा पोयाम
कांकेर(छ.ग.)
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