रचयिता- पुष्पा पटनायक
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
शीर्षक -"जीवन"
विधा- छंदमुक्त कविता
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जीवन जीने की कला
कहां सबको आती है
सुख-दुख इसके दो पहिए
जीवन की गाड़ी चलती है ।
कोई रो-रो कर जीता है
कोई दुख में भी हंसता है
हर पल खुशी तभी मिले
जब कर्म अच्छा करता है ।
आशा रखो तब पाने की
जब देने की हो आदत
जीवन सुखमय हो जाए
जब दुख सहने की हो ताकत।
जीवन के वन- उपवन में
पुष्पा के रखो कथन
कभी निराशा ना होगी
Wow mst hain
ReplyDeleteAti uttam.
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