रचनाकार श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया
जिला। रायपुर
शीर्षक। जीवन रस की प्याली
विधा। मुक्त छंद
जीवन रस की प्याली
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जीवन रस की प्याली में,
दुलार तुम्हें पिला रहा हूँ।
खुद बैठा माटी के बिछौने पर,
गोदी में पर तुमको झुला रहा हूँ।
जब तुम हो जाओगे सबल ,
तब तक बाहों में थाम रह हूँ।
झंझावातों से भरे जीवन में ,
जिजीविषा की लोरी सुना रहा हूँ।
लिख लेना खुद किस्मत अपनी,
आस भरे स्मित से समझा रहा हूँ।
पनाह देकरअपने चंपई आंचल में
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