Friday, July 31, 2020

कांकेर,छत्तीसगढ़ से कवि देवव्रत कर शर्मा जी की कविता- यादों के ताने

नाम       - देवव्रत कर शर्मा 
पता       - आवास पारा जैसा      
कर्रा पोस्ट जैसा कर्रा चारामा जिला कांकेर छत्तीसगढ़  ।
शीर्षक    - यादों के ताने 

कुछ तो बात होगी फ़िजा में 
तेरे आने की आहट ना हुई ।
झरोखे पर बैठे ताकते रहे 
पर कोई सरसराहट ना हुई ।। 

कलरव से आंखें खुली मगर 
नीड़ में कोई हलचल ना हुई ।
मंद मंद मुस्करा कर देखा तो 
हंसी में कोई सनसनाहट ना हुई ।।

हर बार बातों को हंस के टाल देते 
कभी तो किसी राह मुलाकात होगी ।
अक्सर कहते बादलों मे छुप कर 
हो सकता है कि अब बरसात होगी ।।

सुखे खेत सुखे हैं दरिया बिन तेरे 
कब तरस कर तुम बरस जावोगे ।
पपीहे की चाहत बुन्द स्वाति की
आरजू की अब तुम मिल जावोगे ।।

कमल कुमुद जुही चंपा और गुलाब
राग रंग लय ताल सूर के अंदाज है ।
हजारों पहरे है जमाने की नजरों के 
पढ़ने को बाकी बस एक अल्फाज़ है।।

हर रात महकती खुशबू से भर लेते 
तुम्हारे आने की आहट सुन लेते हैं ।
ख्वाब में ख्वाब सजाया करते कभी 
बिसरी यादों के ताने को बुन लेते हैं ।।

** देवव्रत कर शर्मा **

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