Saturday, July 18, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना:- माँ, पत्नि और मैं

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   शीर्षक  -  " माँ, पत्नि और मैं " 
     विधा - छंदमुक्त  
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मनमुटाव तो आप दोनों में है, 
           पर अक्सर दिल मेरा दुःखता है। 
सांस और धड़कन में भला, 
           कौन किसी एक को चुनता है।।

तुने तो मुझे जन्म दिया, 
          परवरिश भी माँ तेरी है। 
ओ भी आई इस अनजान घर में, 
          उसकी जिम्मेदारी भी तो मेरी है।। 

तू भी आयी अपनी माँ को छोड़कर, 
          माँ से दूर जाने का दर्द समझती है। 
फिर ये बता, माँ से अलग रहने को, 
          जिद तू क्यों करती है।। 

तू कहती मेरा बेटा, 
          मेरा पति ओ कहती है। 
पत्नि रहती दिल में मेरे, 
         और दिल में माँ मेरी बसती है।। 

बीच मझदार में, मैं फंस जाता, 
          न पत्नि,न माँ कह पाता।
रिश्ता ये मैं कैसा निभाता, 
          दिल और जान को,जुदा! कैसे कर पाता।। 
                                                                                               
     
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2 comments:

  1. Bilkul sach mama kabhi fark nahi karna chahiye in dono riston me..

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  2. Bilkul sach mama kabhi fark nahi karna chahiye in dono riston me..

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