जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक ---सबका भाग्य विधाता किसान
व्याख्या ---कवि के द्वारा अपनी छत्तीसगढ़ महतारी पुत्र किसान की महिमा का वर्णन किया गया है ।
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सबका भाग्य विधाता किसान
किसान अन्न उपजाता है,और दुनियां उसको खाता है ।
धरती का बेटा किसान ही,सबका भाग्य विधाता है ।
मैं उसकी जय जय करने से, जुबां पीछे नहीं रखता ।
किसान से पहले किसी की जय हो मैं नहीं कहता।
अपने मेहनत से घर घर में, उजियारा वह लाता है ।
है किसी में दम अगर तो,अन्न उपजाकर देखें ।
रास्ता कितना कठिन है, थोड़ा दूर जाकर देखे ।
ऐसा कौन जो परहित में, इतना कष्ट उठाता है ।
जो भी कर्म होते हैं, सब में अन्न ही लगते हैं ।
दान दया धर्म कर्म उसके कारण जग सजते हैं ।
सारी कष्ट वह झेलकर, दुनियां को हंसाता है ।
किसान के कारण सबका, कारोबार चल रहा ।
यज्ञ दान ध्यान योग कर्मकांड,सब फल फूल रहा।
उसके त्याग मेहनत के आगे, मेरा सर झुक जाता है ।
अपने बारे में नहीं सोचा ,न देखा घर और परिवार ।
जीवन उसका साधारण, उच्च कोटि का परोपकार ।
बाकी सब तो स्वार्थी,उसे कभी न कहा जाता है ।
गिरधारी लाल चौहान
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