Thursday, July 2, 2020

राजस्थान से बजरंग दान चारण की कहानी- माधव

लेखक का नाम  _ बजरंग दान चारण 
राज्य  राजस्थान
 निवासी - नाथूसर ,बीकानेर 
कहानी का शीर्षक '   माधव  '
                
               '    माधव  '
                                                 दोपहर के 2:00 बज रहे थे |आकाश आग उगल रहा था | हवा {लू}आग की लपटों की तरह सांय सांय  करके करके चल रही थी | चारों तरफ सन्नाटा है | कथानायक कूलर के आगे से उठकर एक टावल सिर पर  डालकर कमरे से निकला ,वह घर के आंगन में बने कुंड से पानी की बाल्टी भरने लगा | अचानक कथानायक का ध्यान सामने की सड़क पर गया उन्हें लकड़ी के दो बड़े बड़े भारे चलते हुए दिखाई दिए | एक मिनट रुक कर देखा तो देखा  तो पहचान गया कि यह माधव व उसकी पत्नी रामी  है |माधव के बारे में गांव में कथानायक ने पहले से ही सुन रखा था कि वह हमेशा बड़ी-बड़ी लकड़ियों का भारा  जंगल से लाकर मावा भट्टी पर बेचता है तथा उससे मिर्ची तेल लून  आटा खरीद कर अपना  घर चलाता है|  बेचारा करे तो करे भी क्या,  पिता की लाइलाज बीमारी के इलाज में जो कुछ था लग गया |  उसका पुस्तेनी घर भी बिक गया और पिता को भी नहीं बचा पाया | अब बिना पट्टे की जमीन पर दो झोपड़ी बनाकर बसेरा कर रहा है लेकिन ईमानदार इतना की आज तक  एक रुपया भी किसी का नहीं खाया व स्वाभिमानी इतना कि भूखा सो जाता है लेकिन मांग कर नहीं खाता |मैं माधव को देखता हूं तो मुझे महाराणा प्रताप व गाडोलिया लोहारों का त्याग याद आ जाता है | खुद्दारी वह ईमानदारी से जीना सचमुच भाले की नोंक  पर सोने जैसा है |खुद्दारी को हर युग में घास की रोटियां खा कर ही गुजारा करना पड़ा है | जिसको वक्त ने सताया हो दुनिया भी उसे ही क्यों सताती है, इस युग में सच बोलने का हर्जाना बहुत भारी लगता है|    पांच साल पहले गांव में एक बहुत बड़ी मीटिंग रखी गई थी जिसमें ग्राम वासियों के साथ कई बड़े अफसर नेता भी आए थे|  सरपंच साहब पंचायत द्वारा करवाए गए  कार्यों का बखान करने लगे तथा   कागजों में हुए काम गिनाने लगे |अब माधव झुठे बखान सुन नहीं पाया व बीच में ही पूछने लगा , सरपंच साहब स्कूल का खेल मैदान हमें भी दिखाकर लाओ | बेचारे  माधव का एक प्रश्न ही उसकी जिंदगी में प्रश्न चिन्ह बन गया |प्रधानमंत्री आवास योजना में गांव में दो सौ घर बने तथा  सौ नए  नाम बीपीएल सूची  में  जोड़े गए मगर माधव इन  सूचियों में अपना नाम ढूंढता ही रह गया| देश भर में करोड़ों घर बने होंगे लेकिन प्रश्न यह खड़ा होता है कि माधव जैसे न जाने कितने लोग होंगे जिन्हें सच्चाई व खुद्दारी की कीमत चुकानी पड़ी होगी | क्या सचमुच गरीब को खुद्दार नहीं होना चाहिए? क्या सच बोलना यहां गुनाह है |   कोरोना की महामारी  ने पूरे विश्व में त्राहिमाम मचा दिया ,बड़े बड़े मुल्कों को झुका दिया मगर खुद्दारी की खुद्दारी नहीं झुका सका | पिछले दिनों एक भामाशाह द्वारा गांव के 100 जरूरतमंद लोगों के लिए हजार हजार रुपये पंचायत कोर कमेटी को दिए | माधव का पड़ोसी रघू गरीब है मगर ग्रामसेवक व पटवारी के साथ अच्छी बनती क्योंकि वो परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल लेता है साथ  ही विनम्र भी है |   पटवारी जी ने रघु को पंचायत बुलाकर हजार रूपये दिलवा दिये,बेचारा हकदार भी था | इसी तरह जो जो जानकार जरूरतमंद था उन्हें पंचायत द्वारा बुलाकर हजार हजार रुपये उन्हें दे दिए | मगर  माधव अबकी बार भी गाँव के सौ ज्यादा जरूरतमंद लोगों में  अपना नाम दर्ज नहीं करवा पाया | लेकिन दानदाताओं की कोई कमी नहीं थी सरकार के निर्देशानुसार पंचायत ने गांव के दानदाताओं से  अपने हिस्से का सहयोग करने का आह्वान किया |गांव के दानदाताओं ने 150 क्विंटल गेहूं तथा बडी़ मात्रा में  सरसों तेल, दाल व मसाला पंचायत को भेंट कर दिए  इसकी गांव में सबको खबर हो गई की गरीबों के लिए पंचायत में व्यवस्था हो गई है| गरीब पंचायत में जाने लगे ,अपनी स्थिति बताने लगे ,मगर ग्राम सेवक जी और पटवारी जी कई प्रकार के सवाल पूछते हैं फिर 5 किलो का खाद्यान्न किट  दे देते 1            एक दिन सुबह माधव के पड़ोसी पंचायत की तरफ जा रहे थे तभी रघू ने बताया की सरकार द्वारा गरीबों के लिए खाद्यान्न सामग्री वितरित करवाई जा रही है | आज माधव भी रघु के साथ पंक्ति में खड़ा हो गया | माधव की आंखों के सामने रघु सहित पांच लोग अपना खाद्यान्न किट लेकर चले गए |मगर माधव अपने जमीर को मरता देख ग्रामसेवक जी से पूछ बैठा , साहब आप   पांच किलो गेहूं के लिए गरीबों  की इज्जत दुनिया के सामने क्यों उछाल रहे हो?इनकी फोटो क्यों खींच रहे हो? कैसे कैसे सवाल पूछ रहे थोड़ी दया करो |  ग्रामसेवक जी नाराज होकर कहने लगे की अगर आपको लेना है तो लो सरकार का आदेश है फोटो खिंचवानी पड़ेगी | माधव कुछ नहीं बोला हमेशा की तरह  आज भी खाली हाथ लौट आया |              कथानायक  कोरोना वार्ड सर्वे ड्यूटी में माधव के घर की गली से जा रहा है तभी माधव  ने आवाज लगाई माटसाब नमस्कार | कथानायक ने कहाँ नमस्कार भाई माधव कैसा है? ठीक हूँ माटसाब, इतने में घर के आंगन में खेलता हुआ एक बच्चा दिखाई दिया,उसे देखकर माटसाब ने कहा भाई माधव इस बार बालक का स्कूल में दाखिला दिलवा देना  और सुनो माधव  खाद्यान्न आपूर्ति से वंचित लोगों के आवेदन मांगे गए हैं इसलिए ई मित्र पर जाकर आवेदन करवा देना | माधव ने कहा ठीक है माटसाब |                                 माटसाब सर्वे करके स्कूल  गये तो  पीओ साहब ने बताया कि आज दो अजीबोगरीब ऑनलाइन शिकायतों की जांच करके आया हूं  | साहब ने बताया कि गांव में एक सज्जन ने शिकायत करवाई है कि मेरा बेटा भूख से मर गया और मेरे घर पर अन्न का दाना भी नहीं है | तथा दूसरे सज्जन ने  शिकायत करवाई कि मेरे घर पर खाने को अन्न नहीं है इसलिए  हम भूखे मर रहे हैं | जांच में पाया गया कि पहला सज्जन अभी  कुंवारा है , अभी शादी नहीं तो  बच्चा कहां से आया व भूख से कैसे मर गया | यह सुनकर कथानायक सोचने लगा इस देश के संस्कार कहां खो गए ? आज इंसान अपने चंद स्वार्थ के लिए अपना ईमान बेच देता है  | आज आम आदमी भी मुफ्तखोरी की चाहत में अपना जमीर खोता जा रहा है |   दूसरे सज्जन के घर पर गए तो आंखें फटी की फटी रह गई जोधपुरी लाल पत्थर से बना सुंदर घर तथा जिस कमरे में बैठे हैं उसमें तीन  A. c लगी हुई है ,महाशय ने कहा सर चाय नाश्ता लगा दूं | साहब ने यह कहते हुए मना कर दिया की आप पहले ही भूख से मर रहे हैं | चाय नाश्ते की जरूरत नहीं है और साथ साहब ने पटवारी से कहा कि लिख दो शिकायत सही पाई गई यह सज्जन बहुत गरीब है और इन्हें 50 किलो गेहूं मेरी तरफ से भी कल भिजवा देना | यह सुनकर मुझे गुप्त जी  की पंक्तिया याद आ गई  कि 'हम क्या थे  क्या हो गए क्या होंगे अभी '     |                                इतने में मेरे शिष्य राजीव का फोन आ गया वह पूछ रहा था सर 12वीं की परीक्षा कब शुरू हो रही है?मैंने उसे बता दिया अभी समय लगेगा फिर मैंने उसे परिवार के बारे में पूछा, वह बताने लगा सर मेरे चाचा जी को सरकारी योजना की बहुत अच्छी जानकारी है| मैंने कहा कैसे ? उसने कहा सर अब वह ठेकेदारी का काम बंद हो गया है इसलिए चाचा ने ऑनलाइन शिकायत करके खाने कीमुफ्त में  व्यवस्था करवा दी है  | माटसाब ने कहा तेरे चाचा तो करोड़पति है , इतनी बात करके फोन काट दिया | अब कथानायक के दिमाग में माधव की छवि घूमने लगी  वे सोचने लगे की सचमुच गरीबी तो मन की होती है, लोग करोड़पति होकर भी ईमान बेच देते हैं | आज मांगने में किसी को शर्म नहीं आती| हर व्यक्ति कर्जदार है ,मौज मस्ती के लिए  कर्ज ले लेते है  लेकिन, लोगों का स्वाभिमान कहां सो गया?  हमारे बुजुर्ग अभावों में जीकर भी स्वाभिमान की रक्षा करते थे |आज तो भीखमंगों की भीड़ है, बेचारे माधव जैसे असली गरीब तो वंचित ही रह जाते है | बहुत सारे बीपीएल तो वे लोग बने हुए हैं जो बडे़ ठेकेदार है, गाड़ियों में घुमते हैं बंगले में रहते हैं |             मुझे गुजरात के उस भामाशाह का तरीका बहुत अच्छा लगा जिसने गाँव में  यह आवाज लगवाई की मैं गरीबों को एक एक किलो आटा देकर सहयोग करना चाहता हूँ जरूरतमंद लोग जल्द से जल्द पधारकर मेरी छोटी सी भेंट स्वीकार करें  इस बार लाइन में लगे लोगों में एक भी बनावटी गरीब नहीं थे तथा न ही लाल पत्थर के घर वाले गरीब | लोगों को आश्चर्य तब हुआ जब लोगों ने घर जाकर आटा थेली को खोलकर देखा तो उसमें दस दस हजार रुपये थे, यह खबर जब गाँव में फेली तो बनावटी गरीबों के दुख का कोई ठिकाना नहीं रहा |                                कथानायक अपने स्टाफ के साथियों के साथ इन घटनाओं की चर्चा कर रहा था  इतने में माधव आता हुआ दिखाई दिया उसे देखकर कथानायक ने साथी अध्यापक अशोक को बताया की गाँव में कुछ  स्वाभीमानी लोग है जो रोजगार ठप्प होने के कारण बेहाल है तथा सरकारी योजनाओं  से भी वंचित हैं, साथी अशोक ने बताया की    SDM साहब N. D चारण  मेरे सहपाठी रहे हैं तथा वे अच्छे इंसान है ,पहले हिन्दी के प्रोफेसर थे अच्छे साहित्यकार है अगर गाँव के कुछ लोग मेरे साथ चले तो मैं उन्हें स्थिति बता दूंगा मुझे भरोसा है वे जरूर आपकी मदद करेंगे| अगले दिन कथानायक के साथ अशोक सर तथा माधव व उसके साथी चारण साहब के घर गए  , SDM  साहब ने अच्छा सम्मान दिया, अशोक सर ने साहब को बताया की गांव के लोग बेरोजगारी से परेशान है आप नरेगा या अन्य कोई रोजगार शुरू करवाकर इनकी मदद करें, साहब ने बताया  की तहसील स्तर की मिटिंग का आयोजन करके  निर्णय लेंगे तथा जल्द ही काम शुरू करवाएंगे, इतने में माधव का भतीजा छगन बीच में ही बोल गया  कहने लगा साहब मिटिंग कब होगी? SDM साहब  गुस्से में आकर बोले की क्या अभी भुख से मर रहे हो ?छगन कहने लगा साहब माफ करना बाहर जो लोग आए हैं, इनमें से कुछ लोग तीन दिन से भुखे है  कई दिनों से इनके घर पर चूल्हा तक नहीं जला |साहब कहने लगे ऐसे तो नहीं हो सकता,चलो कौन है वे लोग मुझसे मिलाओ,SDM साहब  का छगन के साथ बंगले से बाहर निकलना हुआ  व काफी देर के इंतज़ार व भूखे पेट व गर्मी से आहत माधव  चक्कर खाकर गिर पडा़| साहब तुरन्त  माधव के पास गए व बैठाकर पानी पिलाया |  कथानायक ने साहब को माधव की पूरी कहानी सुनाई |  साहब ने नौकर से कहा की  तुरन्त दस लोगों के भोजन की व्यवस्था करो |साहब एक साहित्यकार है तथा साहित्यकार संवेदनशील इंसान होते हैं उन्हें सब कुछ समझ में आ गया | साहब ने माधव को नीम्बू पानी का गिलास देते हुए कहा माधव  तुझे काम मिल गया है आज से तुम मेरे बगीचे में पानी डालोगे तथा इस एवज में तुम्हें दस हजार रुपये व खाना मिलेगा | माधव का मुरझाया चेहरा खिल गया माधव कहने लगा साहब में बगीचे में पानी जरूर डालूँगा | मेरी  आत्मा मुफ्तखोरी व हराम का दाना गवारा नहीं करती 1
               लेखक _ बजरंग दान चारण 
               व्याख्याता हिन्दी

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