Monday, July 13, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक कृत आलेख- हरियाली

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
शीर्षक -"हरियाली"
विधा- आलेख
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                हरियाली ,खुशियाली  और  प्रेम का  पर्व  है  ।   यह  त्यौहार पर्यावरण को समर्पित त्यौहार है जो ,सावन मास की अमावस्या को मनाया जाता है,   क्योंकि    यह   पूर्णरूपेण हरियाली का पर्व है इसलिए इसे हरेली का पर्व भी कहते हैं।

                 यह  छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्यौहार है जो पानी   गिरने या ये कहें  की   किसानों  के द्वारा   अपने  औजारों उपकरणों जैसे नांगर, गैती ,फ़ावड़ा ,कुदाली आदि की साफ-सफाई कर पूजा की जाती है।इस त्यौहार में द्वार पर नीम की पत्तियां व चौखट पर कील ठोकी जाती है ।ऐसा माना जाता है कि, ऐसा करने से घर में रहने वाले लोगों की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है । 
                 हरेली में अपने घर के देवी- देवताओं एवं ग्राम के देवी -देवताओं की पूजा करते हैं  एवं  गुड़ और  चावल का चीला बनाकर चढ़ाया जाता है ।हरेली पर्व के दिन का मुख्य आकर्षण गेड़ी होता है ।इस दिन गांव के बच्चे बांस  एवं लकड़ी से बने गेड़ी चढ़ते हैं ,जो   कीचड़  युक्त गलियों  में चलने के साथ -साथ प्रथा के रूप में वर्षों से चली आ रही है।
                इस त्यौहार में देवी देवताओं के  मानव शरीर में चढ़ने एवं झूपने की प्रथा भी प्रचलित है, जो कि अंधविश्वास को उजागर करती है।   इस  प्रथा  का समाज में व्याप्त होना कहीं न कहीं इस उल्लास के पर्व हरेली की छबि को धूमिल कर रहा है।

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