01. साहित्यकार का नाम :
देवयानी शुक्ला
02. जिला :- रायपुर (छत्तीसगढ़)
03. रचना का शीर्षक :- *ख़्वाब*
04. विधा :- छंदमुक्त
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ख़्वाब.....
रातरानी के फूल हैं जैसे
रात ही खिलते और महकते हैं
सुबह के माथे की शिकन हैं ये
बेसबब रात भर टहलते हैं
सच की चिंगारियों की
सोहबत में
सूखे पौधों की तरह जलते हैं
टें टें करते हैं
बाँचते हैं मुकद्दर सबका
क़ैद तोते हैं
रिहा होने को मचलते हैं
बड़ी ऊँची उड़ान भरते हैं
आँखें खुलते ही टूक होते
और बिखरते हैं
किसी गिलहरी के अखरोटों से
छिपे रहते हैं
अचानक दरख़्त बनते हैं
ख़्वाब ..मासूम से फ़रिश्ते हैं
नेक आँखों में ही पनपते हैं
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