Tuesday, July 14, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार कृत संस्मरण- बारहवी की परीक्षा

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   विधा - संस्मरण 
   शीर्षक  -  " बारहवी का परीक्षा परिणाम "
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बात को बीते हुए 13 वर्ष हो गए हैं यह बात सन् 2007 की है ।लेकिन आज भी मैं जब उस घटना को याद करता हूंँ तो मेरा मन प्रफुल्लित-सा हो उठता है कहते हैं स्कूल का जीवन सभी के जीवन का एक खुशनुमा पल होता है मैंने भी स्कूल की वह जिंदगी जी है बात उस समय की है जब मैं 12वीं क्लास में पढ़ता था। 

ऐसी ही रोज समय व्यतीत हो रहा था। फिर ओ घड़ी आई जिसका नाम मात्र विद्यार्थी के मन में भय का माहौल बना देता है। हाँ, मैं बात कर रहा परीक्षा की।  परीक्षा की समय सारिणी आ गई थी। मैं भी तैयारी में अपनी जुट गया था। मुझे आज भी याद है ओ दिन जब मेरा हिन्दी का पर्चा होना था। मैं परीक्षा की पहली रात को ज्यादा देर तक पढ़ाई नहीं की क्योंकि अगले दिन परीक्षा भी तो दिलाने जाना था। अगले सुबह पक्षियों के चहचहाहट के साथ मेरी सुबह हुई। मैं जल्दी से तैयारी होकर निकल गया परीक्षा दिलाने।
 
परीक्षा हाल में सब आ गये थे मैं भी समय पर पहुँच गया । उत्तर पुस्तिका और प्रश्नपत्र भी अब मिल गये सबको। फिर क्या सब लग गए अपना अपना उत्तर लिखने। मैं भी व्यस्त हो गया अपना उत्तर लिखने में। 
आधा समय व्यतीत हुआ था फिर परीक्षा कक्ष के शिक्षक छात्रों की उत्तर पुस्तिका की जाँच में लग गए बारी बारी सबकी जाँच कर हस्ताक्षर कर रहे थे। मेरे भी हाथ उत्तर लिखने में व्यस्त थे तभी शिक्षक जी मेरा उत्तर पुस्तिका को जाँच के लिए माँगा। मैंने दिया शिक्षक जी मेरे उत्तर पुस्तिका को हस्ताक्षर करने के बाद भी देख रहे। मैंने देखा कि शिक्षक जी सभी पन्नों के मेरे लिखे उत्तर को ध्यान से देख रहे थे। 
तभी अचानक उन्होंने कक्षा के कोलाहल को शांत कराते हुए बोला- देखो ये लड़का कितना सुंदर उत्तर लिखा है। और ओ भी सभी प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार ।शिक्षक जी बहुत खुश हुए और उन्होंने पूरे कक्ष में ये घोषणा कर दी कि अगर इस लड़के का परीक्षा परिणाम 80% नहीं आया तो मैं अपना नौकरी से इस्तीफा दे दूँगा। यह सुनकर सभी छात्र- छात्राओं की नजर शिक्षक और मेरे ऊपर पड़ गई। सभी छात्र फिर से अपने उत्तर लिखने में व्यस्त हो गए। और सर भी मुझे शाबासी देकर अन्य विद्यार्थी के जाँच में लग गए। 

कुछ महिनों के बाद परिणाम घोषित हुआ।मुझे बहुत डर लग रहा था क्योंकि मुझे सर की उम्मीद पर खरा भी तो उतरना था। भय इस बात का भी था कि अगर मेरे अंक उतने नहीं आये तो शिक्षक जी का मेरे ऊपर से विश्वास उठ जायेगा। यही सोच सोच के मैं बहुत परेशान हो गया था। 
फिर मैंने इंटरनेट से मेरा परिणाम देखा। परिणाम देख कर मैं बहुत दुखी हुआ। मेरे आँखों से आँसू निकल आये क्योंकि मेरा अंक 75% आया था। मुझे दुःख इस बात का नहीं था कि मेरा अंक कम आया बल्कि दुख इस बात का था कि आज मैंने एक शिक्षक का भरोसा तोड़ दिया था। 
तब कैफे वाले भैया बोले आपका अंक तो सभी विषयों में 80 से ज्यादा है तो अंग्रेज़ी में 34 ही क्यों। फिर कैफे वाले भैया ने पुनर्मूल्यांकन की सलाह दी। 
मैंने देरी नहीं की और पुनर्मूल्यांकन के लिए फार्म भर दिया। कुछ दिनों के बाद उसका परिणाम भी आ गया। आज भी डरा हुआ था पर जैसे ही मैंने परिणाम देखा मैं खुशी से झूम उठा। मेरा अंग्रेजी का अंक संशोधित हो गया था 34 से बढ़कर 78 हो गया था। और मेरा  प्रतिशत 75 से बढ़कर 84.2% हो गया था। मैंने पूरे कक्षा में सबसे ज्यादा अंक हासिल किए थे। 

आज मन को हल्का लगा क्योंकि मैं आदरणीय सर जी के उम्मीद पर खरा उतर गया था। सर जी का आशीर्वाद मिला मुझे बहुत अच्छा  लगा। सर जी भी मेरे परिणाम देखकर भावुक हो गए थे। 
आज फिर उन दिनों को याद करके आँखें नम-सी हो गयी। 


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4 comments:

  1. Aap to intelligent ho ji����

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  2. Class 1 se lekar 12class tak ka safar ek sath rha h sir sabhi class me aap no.1 par hi tha aur aage bhi aap no.1 par bana rhe sir .

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