स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
शीर्षक -"गाइड शिक्षक"
विधा- संस्मरण
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बात उन दिनों की है जब मैं कक्षा छठवीं में थी । मेरी शिक्षक श्रीमती स्वर्णकार मैडम ने मुझे स्काउट गाइड में जोड़ा तब मैं इसमें बेमन से जुड़ी थी। पर धीरे-धीरे स्काउट गाइड के कार्यों ने मुझे बहुत प्रभावित किया। स्काउट गाइड में अनुशासन , सेवा कार्य एवं मार्च फास्ट करना,यह सबमुझे इतना भाग गया कि 1 वर्ष में ही मुझे मेरे कार्यों को देखते हुए मेरे दल का कैप्टन बना दिया गया । 26 जनवरी 1996 को रायगढ़ के कलेक्ट्रेट ग्राउंड में मार्च फास्ट में मुझे मेरे दल का नेतृत्व करने का सौभाग्य मिला। यह वह पल है जिसे मैं आज भी स्मरण करके रोमांचित हो जाती हूं। मेरा मन प्रफुल्लित हो जाता है।आगे दसवीं कक्षा तक मैंने इस क्षेत्र से जुड़े कई कार्य किए और काफी प्रशंसा की पात्र रही।
दिन बीततेे चले गए मैं पढ़ लिख कर एक शिक्षक के रूप में स्कूल में कार्यभार ग्रहण की और इसी कार्य को करते हुए मुझे 6 वर्ष बीत चुके थे ।एक दिन अचानक मुझे मेरे स्कूल के प्रधानाध्यापक के द्वारा गाइड शिक्षक हेतु चयन कर प्रशिक्षण के लिए भेजा गया ।मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा आज मेरी शिक्षक श्रीमती स्वर्णकार मैडम के द्वारा मुझे जो भी सीखने का मौका मिला था उसे भुनाने का समय आ चुका था। मैं प्रशिक्षण में गई और सात दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त करअपने शाला वापस आई और अपने शाला के बच्चों को कुशल गाइड बनने हेतु प्रशिक्षित करने लगी ।
आज मैं एक एडवांस गाइड कैप्टन के पद पर हूं और मेरे शाला के बच्चे प्रथम ,द्वितीय ,तृतीय सोपान पार कर राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त करने की ओर अग्रसर हैं।
गाइड शिक्षक श्रीमती स्वर्णकार मैडम जी को कोटि -कोटि नमन एवं तहेदिल से धन्यवाद करती हूँ।
Nice
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