Saturday, July 25, 2020

बिलासपुर,छत्तीसगढ़ से कवयित्री मीनाक्षी अवस्थी 'छाया' जी की कविता:-मौत से सबको है भय

कवयित्री- मीनाक्षी अवस्थी'छाया'
जिला-बिलासपुर(छत्तीसगढ़)

शीर्षक- मौत से सबको है भय

 मौत से सबको है भय , हों गैर या अपने,
  खुद बचें, जग को बचा लें, जागते सपने।
 जँग अद्भुत सामने है, मृत्यु ने ताँडव रचाया,
 कैद सब अपने ही घर में,जिंदगी दूरी में पाया।
  कह सकें किससे व्यथा, सब भागते अपने?
 खुद बचें, जग को बचा लें, जागते सपने।
 साँस पर पहरा लगा है,मास्क चेहरे पर सजा है,
  दो कदम बाहर चलें तो,खौफ डँडों का लगा है।
  ओह कोरोना अनोखा , झाँकते अपने.....
 खुद बचें जग को बचा लें, जागते सपने।
  सुनसान सारी राह दीखें, मौत से गुमनाम चीखें,
   ब्याह शादी,मौत मातम, भीड़ से बचना ही सीखें।
  दूरियों की रख के 'छाया', नापते अपने।
 खुद बचें, जग को बचा लें, जागते सपने।।
          मीनाक्षी अवस्थी 'छाया',बिलासपुर, छत्तीसगढ़।

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