Wednesday, July 29, 2020

महासमुन्द, छत्तीसगढ़ से कवयित्री द्रोपती साहू"सरसिज" जी की कविता- मया हियाव

कवियित्री-द्रोपती साहू "सरसिज"
जिला-महासमुन्द, छत्तीसगढ़         
शीर्षक;"मया हियाव"
विधा-कविता(तुकांत)
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भाई बहिनी के मया अगम हे,
जेकर नइ हे कोनो ओर छोर।
राखी के एक ताग सुंत लागय,
जइसे भाई बहिनी के मया डोर।।

अपन मुंहूँ के कंउरा ल बंचाके,
छोटे भाई बहिनी के मुंहूँ म डारे।
महतारी असन हियाव करइया,
कनिहा म पा के गली किंदारे।।

बहिनी के लाज मान रखइया,
रखवार तिंही डेहरी के भइया।
बल बंधाथे तोर बल देख के,
बाप जइसन बर कस छँइया।।

एक ठन डोरी गुलाल के टीका,
बाँधथे मया म भाई बहिनी ला।
बिपत्ति म दुनो के दुलार निका,
समोखव हाँस के भाई बहिनी ला।।

अमर अजर नता भाई बहिनी के,
दूसरों बर घलो राखी भेजावय।
सुवारथ के कचरा घुरूवा डारव,
लहू के जम्मों नता गोता हियावय।।
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