Friday, July 24, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- संस्कार

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
शीर्षक -"संस्कार"
विधा- छंदमुक्त कविता
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संस्कार से आती बहार 
सपने हो जाते साकार 
हर सदस्य झूमके कहता 
सबसे अच्छा मेरा परिवार ।

पूर्वजों के दिए संस्कार
देखता है  सारा  संसार 
कहते  ना  थकते  लोग 
अच्छा  है  घर  परिवार ।

घर  होता  है  घर  जब 
बड़ों का  करते  सम्मान 
संस्कार तभी झलकता है 
मां बाप के पूरे हों अरमान ।

संस्कार  की बातें अब
किताबों में  मिलती हैं
बाप  बेटे  से  और माँ
बेटी से दूर से  मिलती हैं।

बातों में  जज्बातों  में 
बहुत फर्क झलकता है 
दुनिया जैसे ऊब गई हो 
संस्कार बोझिल लगता है।

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