जिला :- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- संस्कार भरें।
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गुरु शिष्य की परंपरा,
भरे मन में सदभाव।
ऐसी शिक्षा दे उन्हें,
मिटे क्लेश, दुर्भाव।
औरों के लिए आदर भाव का,
आओ हम संचार करें।
संस्कार भरें, संस्कार भरें। २
मिले विरासत में उनको भी,
पुरातन की वो संस्कृति।
मूर्ती पूजा ना सही पर,
हो बुजुर्गों से भक्ती।
आंख ना दिखाएं बड़ों को,
ना वे कभी बागी विचार धरें।
संस्कार भरें, संस्कार भरें। २
वे जाने महत्व परिवार का,
वसुधैव कुटुंबकम् का पाठ पढ़ें।
वो जाने इतिहास को और,
विज्ञान में नव कृतिमान गढ़े।
नव विचार समावेश करें और,
रूढ़िवादी का दुत्कार करें।
संस्कार भरें, संस्कार भरें। २
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने वर्तमान जीवन में नई पीढ़ी के मन में संस्कार भरने की कल्पना की है।
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