"अहसास"
कवियित्री;द्रोपती साहू "सरसिज"
जिला-महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक: "अहसास"
विधा-कविता
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मिलें दिल से किसी से जब भी
आत्मियता की महक आए।
दिल सब के चैन सुकूं पाए,
अंतर्मन भी चहक जाए।।
तौलें फिर अपना मुँह खोलें,
मन में कलियाँ खिल जाए।
मिलें चाहे पहली बार सही,
सौ बार सा अहसास आए।।
तकलीफें न समझ सके ग़र,
उन मासूम दीन-दुखियों की।
ना हक जीयें जाएँ बोझ बन,
कीमत नहीं है खुशियों की।।
मानव हैं विवेकवान अगर,
दिलों में सबके राज करें।
जीवन का कल क्या भरोसा,
नेक काम यह आज करें।।
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द्रोपती साहू "सरसिज"
महासमुन्द, छत्तीसगढ
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