*रचयिता - प्रेरणा पटेल*
*बेलरगांव धमतरी (छ.ग.)*
तप्त गलियाँ,तृप्त मेह से
धरा में आनंद छाया है
जगत का संताप हरने ये सावन आया है....
कण-कण सराबोर आगमन से
संग उम्मीदों का सागर लाया है
वसुधा की प्यास बुझाने ये सावन आया हैं....
सूखी धरती तर हो गयी
कृषकों का मन हर्षाया है
अन्न की सौगात देने ये सावन आया है....
लिए बेलपत्र चले कांवड़िए
शिव सत्य ये जगत माया है
भोले का आशीष देने ये सावन आया है....
बूंद-बूंद मन तृप्त करता
सावन हर मन को भाया है
हरित श्रृंगार कराने देखो ये सावन आया है....
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