Friday, July 24, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- संस्कार

*रचनाकार-एच-एस-अरमो"अरमान"
निवास-बैरन बाजार,रायपुर ।
*जिला--रायपुर,छ.ग-।
*शीर्षक:-  "" संस्कार ""
*विधा--छंद-मुक्त (कविता)

              संस्कार
              ********
संस्कार,जाति-धर्म-नीति है,
जन्म से मरण तक,इसकी परिणिती है
भारत में विविधता,रिवाजों की है,
उत्तर से दक्षिण,पूरब से पश्चिम तक है,
नया साल,नवा खाई की,अलग बात है।

मृत्यु-संस्कार में होता---
किसी का,कब्रिस्तान में,कब्र -दाह ।
तो किसी का,होता मरघट में दफन,
और किसी का,पंचतत्वों में अग्नि-दहन ।

मन्दिरों के चौखट में---
हुआ करती थी,पशुबलि प्रथा ,
तो होती थी,पहले सती प्रथा,
बाल-विवाह और जातिभेद प्रथा,
पर,मिटी,ये आज,सब कुप्रथा ।

मन्दिरों में,बजे घंटी और शंखनाद,
गिरिजा में,जले मोमबत्ती,होती प्रार्थना,
गुरूद्वारा में,होती गुरुग्रन्थ-अरदास,
मस्जिद में,होती कुरान-पाठ- नमाज़ ।

धर्म-संस्कारों की जटिलता,
ने,कई धर्म- पंथीयों को जन्मा,
गौतम,गुरूनानक,महावीर,कबीरा,
कबीरपंथी,बौद्धों,जैनियों व सिक्खों,
निर्गुण ,सगुण भक्ति धारा,भेद बताया,
पाखंड-अन्धविश्वास को,है मिटाया ।

धर्म-संस्कारों से, जातिवाद उपजी,
युग-परिवर्तन,धर्म-ग्रंथों की,कृति रची,
काल-घटनाओं का,वही इतिहास बनी,
मानवीयता जगाने,युगपुरूष-उत्पत्ति ।

धर्म-संस्कारों ने ही---
जाति-वर्गीकरण परिपाटी बनायी,
सामाजिक-रिश्तों-नातों का,बन्धन भी,
समाज-समूहों को,विशेष पहचान दी ।
=====****इति****=========
व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि संस्कार ही प्रत्येक जाति-धर्म-संस्कारों की जननी है और आदि से अब तक के बदलाव को सामने रखने की कोशिश की है।
======================

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...