निवास-बैरन बाजार,रायपुर ।
*जिला--रायपुर,छ.ग-।
*शीर्षक:- "" संस्कार ""
*विधा--छंद-मुक्त (कविता)
संस्कार
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संस्कार,जाति-धर्म-नीति है,
जन्म से मरण तक,इसकी परिणिती है
भारत में विविधता,रिवाजों की है,
उत्तर से दक्षिण,पूरब से पश्चिम तक है,
नया साल,नवा खाई की,अलग बात है।
मृत्यु-संस्कार में होता---
किसी का,कब्रिस्तान में,कब्र -दाह ।
तो किसी का,होता मरघट में दफन,
और किसी का,पंचतत्वों में अग्नि-दहन ।
मन्दिरों के चौखट में---
हुआ करती थी,पशुबलि प्रथा ,
तो होती थी,पहले सती प्रथा,
बाल-विवाह और जातिभेद प्रथा,
पर,मिटी,ये आज,सब कुप्रथा ।
मन्दिरों में,बजे घंटी और शंखनाद,
गिरिजा में,जले मोमबत्ती,होती प्रार्थना,
गुरूद्वारा में,होती गुरुग्रन्थ-अरदास,
मस्जिद में,होती कुरान-पाठ- नमाज़ ।
धर्म-संस्कारों की जटिलता,
ने,कई धर्म- पंथीयों को जन्मा,
गौतम,गुरूनानक,महावीर,कबीरा,
कबीरपंथी,बौद्धों,जैनियों व सिक्खों,
निर्गुण ,सगुण भक्ति धारा,भेद बताया,
पाखंड-अन्धविश्वास को,है मिटाया ।
धर्म-संस्कारों से, जातिवाद उपजी,
युग-परिवर्तन,धर्म-ग्रंथों की,कृति रची,
काल-घटनाओं का,वही इतिहास बनी,
मानवीयता जगाने,युगपुरूष-उत्पत्ति ।
धर्म-संस्कारों ने ही---
जाति-वर्गीकरण परिपाटी बनायी,
सामाजिक-रिश्तों-नातों का,बन्धन भी,
समाज-समूहों को,विशेष पहचान दी ।
=====****इति****=========
व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि संस्कार ही प्रत्येक जाति-धर्म-संस्कारों की जननी है और आदि से अब तक के बदलाव को सामने रखने की कोशिश की है।
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