Friday, July 24, 2020

रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना- संस्कार

रचनाकार--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
शीर्षक--'भरते थे गुरुवर संस्कार'
                        ०×××××××०
वैदिककाल में  देश  अपना , रहा   था  गुणागार ।
आश्रम मेंं  गुरुवर  छात्रों  में , भरते  थे   संस्कार ।।
तब  सारे   देश  में  रहा  था , जैसे स्वर्णिम काल ,
बच्चों को माँ-पिता ज्ञान दी , घरों में  पाँच  साल ।
पालनपोषण  सब  करते थे , देकर  खूब   दुलार ।।
आश्रम में  गुरुवर  छात्रों  में , भरते   थे  संस्कार ।।१
उन्हें सेवार्थ गुरु  चरणों  की , पहुँचाते    बुधवान ,
आचार्यवर  वहाँ  शिष्यों को , देते   थे   सद्ज्ञान ।
भरते   आदर्श  भाव   उनमें , करुणा  नेह अपार ।।
आश्रम में  गुरुवर  छात्रों  में , भरते   थे  संस्कार ।।२
आश्रम समेत  गुरु की  सेवा , करते थे  दिन-रात ,
सिरोधार्य   सदैव   करते  थे , गुरु माता  की बात ।
वर्ष पचीस आयु  तक बच्चे , पढ़ते  गुरु अनुसार ।।
आश्रम में  गुरुवर  छात्रों  में , भरते   थे  संस्कार ।।३
सेवा  भाव  मन   में  जगाते , श्रमपर   देते   जोर ,
सत्य-अहिंसा-दया-क्षमा  से , मन मारता  हिलोर ।
रग-रग  में  भरते  शिष्यों के , सदैव श्रेष्ठ  विचार ।।
आश्रम में  गुरुवर  छात्रों  में , भरते  थे   संस्कार ।।४
लोभ - तृष्णा  से  बचाते  थे , वैभव का  है त्याग ,
ईश्वरमय  विश्व  को   बताये , जीवोंपर   अनुराग ।
शिष्यों का  जीवन  गढ़ते थे , ज्यों  कोई कुम्हार ।।
आश्रम में  गुरुवर  छात्रों  में , भरते  थे   सस्कार ।।५
आज जमाना बदल  गया है , बदले  सोच तमाम ,
विद्यालयों  से  संस्कार  का , मिटा  दिये  हैं नाम ।
जिससे  बढ़ा  दुष्कर्म-हत्या , छाया      भ्रष्टाचार ।।
आश्रम में  गुरुवर  छात्रों  में , भरते  थे   संस्कार ।।६
संस्कार को है  आज मन में , मानें सब  बकवास
तब तो 'ठाकुर' देश में  बढ़ा , नैतिकता का  ह्रास ।
रही  है   शिक्षानीति  हमारी , सह दोषी  सरकार ।।
आश्रम में  गुरुवर  छात्रों  में , भरते  थे   संस्कार ।।७
                           ०×××××××०
व्याख्या--प्राचीन एवम् अर्वाचीन परिवेश में सं

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