जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक --- संस्कार
व्याख्या ---कवि के द्वारा जीवन में संस्कार का विशेष महत्त्व है संस्कार बिन मानव सम्पूर्ण नहीं रहता । संस्कार पर सभी व्यक्ति को जोर देना चाहिए ।
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संस्कार
संस्कार की गंगा ,बहा दो अपने घर में।
घर में बहने लगे, बहाना दुनियां भर में ।
सबको संस्कारवान बनाना है जरुरी ।
जितना बना सको बनाना जीवन भर में ।
संस्कारों से घर परिवार चलता है यहां ।
संस्कार से हर कोई बदलता है यहां ।
संस्कार विहीन जीवन से,अच्छाई कहां ।
संस्कार ही मनुष्य को बनाता है महा ।
सदा सत्य का पाठ रखना है याद ।
इससे बढ़कर कोई भी नहीं जायदाद ।
अहिंसा का मार्ग पालन आवश्यक।
जरुरी है जानना कर्म का स्वाद ।
मानवोचित धर्म मानना भी उचित ।
जो मानव को मार्ग दिखाए समुचित ।
सदाचार ,व्यवहार सबसे स्नेह ,दया ।
इन गुणों से सभी हो परिपूरित ।
बड़ों की सद सद आज्ञा मानना ।
माता पिता की सेवा में समर्पित ।
गुरु से मिले उत्तम ज्ञान का विस्तार ।
जीवन में सबको हो यह अर्जित ।
संस्कार हमें बहुत कुछ है सिखाती ।
बिना भटकाए सदमार्ग पर ले जाती ।
संस्कार का जीवन से परित्याग न हो ।
सम्पूर्ण मानव है वह सबको बनाती ।
गिरधारी लाल चौहान
जीवन में संस्कार माता पिता से बच्चों को मिलता है। आपके जैसे विचारधारा वाले पिता सबको मिले तो कितना अच्छा हो...
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