Friday, July 24, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- संस्कार

 नाम----गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता 
शीर्षक --- संस्कार
व्याख्या ---कवि के द्वारा   जीवन में संस्कार का विशेष महत्त्व है संस्कार बिन मानव सम्पूर्ण नहीं रहता । संस्कार पर सभी व्यक्ति को जोर देना चाहिए ।
************************************************

 संस्कार

संस्कार की गंगा ,बहा दो  अपने घर में।
घर में बहने लगे, बहाना दुनियां भर में ।
सबको संस्कारवान बनाना है जरुरी ।
जितना बना सको बनाना जीवन भर में ।

संस्कारों से घर परिवार चलता  है यहां ।
संस्कार से हर कोई बदलता है यहां ।
संस्कार विहीन जीवन से,अच्छाई कहां ।
संस्कार ही मनुष्य को बनाता है महा ।

सदा सत्य का पाठ रखना है याद ।
इससे बढ़कर कोई भी नहीं जायदाद ।
अहिंसा का मार्ग पालन आवश्यक।
जरुरी है जानना कर्म का स्वाद ।

मानवोचित धर्म मानना भी उचित ।
जो  मानव को मार्ग दिखाए समुचित ।
 सदाचार ,व्यवहार  सबसे स्नेह ,दया ।
इन गुणों से सभी हो परिपूरित ।

बड़ों की सद सद आज्ञा मानना ।
माता पिता की सेवा में समर्पित ।
गुरु से मिले उत्तम ज्ञान का विस्तार ।
जीवन में सबको हो यह अर्जित ।

संस्कार हमें बहुत कुछ  है सिखाती ।
बिना भटकाए सदमार्ग पर ले जाती ।
संस्कार का जीवन से परित्याग न हो ।
सम्पूर्ण मानव है वह सबको बनाती ।

गिरधारी लाल चौहान

1 comment:

  1. TARUN KUMAR BARETHJuly 24, 2020 at 9:41 AM

    जीवन में संस्कार माता पिता से बच्चों को मिलता है। आपके जैसे विचारधारा वाले पिता सबको मिले तो कितना अच्छा हो...

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...