Tuesday, July 21, 2020

महासमुन्द से द्रोपती साहू"सरसिज" की कविता:-सुनहरे ख्वाब

द्रोपती साहू "सरसिज"महासमुन्द, छत्तीसगढ़                              
            शीर्षक;"सुनहरे ख़्वाब"
             विधा-कविता(तुकांत)
                   *****
आँखों में एक ख़्वाब नया, 
जीवन में उत्साह भरता है।
पूरा करने उन ख़्वाबों को,
मन कुछ नया जतन करता है।।

ख़्वाब वही होते हैं सच्चे,
जिसे जागते में देखे जाते हैं।
पाने अपने तय लक्ष्य को,
कर्तव्य पथ पर डट जाते हैं।।

आँखों में बुनें हैं ख़्वाब तो,
चलेंगे सद्मार्ग सफलता के।
मंजिल हमें मिलेगी ज़रूर,
ज़रा कारीगर बनें कुशलता के।।

परिश्रम हमें सफलता देगी,
ख़्वाब सुनहरे देखें जिद ठानें।
विवेक से काम लेते चलेंगे,
सफल हों पहाड़ सा कद बनें।।
               *****
           द्रोपती साहू "सरसिज" 
           महासमुन्द (छत्तीसगढ़)
          

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