जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक --धीरे धीरे मिटता अंधविश्वास
व्याख्या -कवि के द्वारा व्याप्त अंधविश्वास का वर्णन किया गया है ।
************************************************
धीरे-धीरे मिटता अंधविश्वास
अंधविश्वास की जड़ गहरी ।
जायेगा यह धीरे धीरे ।
क्या शिक्षित क्या अशिक्षित ।
इसके चक्कर में सब फिरे ।
जीना मरना पैदा होना ।
सब में अंधविश्वास ।
खाना पीना सोना उठना बैठना ।
सभी में इसका वास ।
आंख फड़कना कौआ बोलना।
बिल्ली रास्ता काटना शव का दिखना ।
खाली घड़ा दिखना, पीला वस्त्र धारी
एक से एक इसकी है पिटारी ।
कुछ का इससे रोजगार चले ।
कुछ का इससे घर उजड़े ।
किसी का बकरा किसी की मुर्गी ।
की खुलेआम बली चढ़े ।
विज्ञान वक्त में आकर
सबको सही राह दिखाकर ।
भोले भाले सीधे साधे बचाकर ।
रख दिया अंधविश्वास मिटाकर ।
सबकी बोलती बंद किया है ।
नये जीवन का छंद दिया है ।
कुछ अपना रहे यह राह ।
कुछ ने अपना लिया है ।
रुढ़िवादी परम्परा खेल खत्म होगा ।
आधुनिकता के विचार में कोई खायेगा न धोखा ।
नया सबेरा दिख रहा मिट रहा अंधेरा ।
सुख मय भविष्य का हो रहा बसेरा ।
एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु को आपने समाज के सामने प्रस्तुत किया है, बहुत ही सराहनीय। मैं जानना चाहूँगा कि आप ईन सब बातों में कितना विश्वास रखते हैं? धन्यवाद ��
ReplyDelete