स्थान- लैलूंगा, जिला-रायगढ़
विधा-संस्मरण
मेरा भाई
बचपन मे मैं दो भाइयों की इकलौती बहन थी।मेरा बड़ा भाई मुझसे मात्र एक साल बड़ा था और छोटा 4 साल छोटा था।
जब दीपावली का उत्सव आता हम सब बहुत खुश होते क्योंकि यह हमारा पसंदीदा त्योहार था। पापा शहर से हम तीनों
के लिये पटाखे लाते और झगड़ा ना हो इसलिए बराबर बाट देते।
अब दीपावली क्योंकि 3 दिन तक मनाते
थे पहले धनतेरस फिर छोटी दीपावली फिर बड़ी दीपावली तो शाम को जब मम्मी और पापा पूजा करते तब हम पटाखे लेकर बाहर निकल जाते क्योंकि हम जमीदार परिवार से थे तो हमारी ही उम्र के बच्चे हमे पटाखे जलाते हुए देखने आते क्योंकि वो सब
पटाखे उनके पहुँच से बहुत दूर होती ,वे खरीद नही सकते थे।
बड़े भाई हमेशा अपने हिस्से की फटाखे उन बच्चों में बांट देते और जब पापा पूछते की तुम्हारे फटाखे कहाँ गए तो कहते सारा जला दिया आप बहुत देर तक पूजा करते हैं।मुझे वो क़सम देते की मैं किसी से सच न कहूँ और हम दोनों मेरे हिस्से की फटाखे जलाते।
जब मैं उनसे पूछती आप ऐसा क्यूँ करते
हैं तो बोलते की उनके चेहरे में फटाखे मिलने पर जो ख़ुशी होती
है उससे सुकून मिलता है फटाखे जलाने पर वो ख़ुशी नही मिलता।उनकी यही सोच आज भी है कि दूसरों को खुश करने
से जो आनंद मिलता है वह अपने लिए कुछ करने से नही मिलता
इसीलिए में उनका बहुत सम्मान करती हूँ और ये घटना कभी
नही भूलती। अब हम तीनों जब भी कोई त्योहार आता है
हमेशा अपने आस पास के बच्चों को उपहार देते हैं और अपने
बच्चों का जन्मदिन भी अनाथाश्रम में ही मनाते हैं।
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