जिला- कोरबा छत्तीसगढ़
विधा -कविता " पर्रा भर लाई" विषय पर
शीर्षक- " बिटिया की विदाई "
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बड़े धूम धाम से माँ-बाप नें बिटिया की ब्याह रचाई
उम्र भर की मेहनत के पैसों को लेन देन में लुटाई ।
बिटिया के लिऐ वस्त्र आभूषण और जेवरात की अंबार लगाई ।
ससुराल विदा कर बिटिया को ;
बिलखनें लगे माँ-बाप, बहन-भाई ।
मन में इस बात की है आस लगाई कि बिटिया आकर ससुराल से ;
हमारे लेन-देन की सुनाऐगी दुहाई ।
एक बार अश्रुगंगा उन सब के आँखों में आई ,
जब सुनें बिटिया से वहां तो कह रहे थे " पर्रा भर लाई " ।
।। इति ।।
गोमती सिंह
ब्याख्या- रचनाकार यह दर्शाने का प्रयास कर रही है कि माँ-बाप अपनी बिटिया को चाहे जितना भी दहेज देकर विदा करते हैं, ससुराल वाले संतुष्ट नहीं होते ।
गोमती सिंह
कोरबा छत्तीसगढ़
बहुत भावपूर्ण सुंदर रचना गोमती जी
ReplyDeleteउत्तम रचना ऐसे ही लिखते रहा करिये निरंतर।
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