जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---पर्रा भर लाई पर आधारित मुक्त कविता सृजन
शीर्षक -- जिनगी के कमाई
व्याख्या -कवि के द्वारा मेहनत करने एवं प्राप्त फल का वर्णन किया गया है ।
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जिनगी के कमाई
मोर करा पर्रा भर लाई ।
बगरे चंदा चंदैनी कस भाई ।
मोरो ले ज्यादा तेहर पाबे ।
करबे जांगर टोर कमाई ।
उन्नति के मोर पहिचान ए ।
सुख सुमत के एमा बखान हे ।
धरती ले आकाश तक उड़ान हे ।
मोर करा एको नइये दुखदाई ।
खार म मोर जबड़ जबड़ खेत हे।
खेत म जब देख तब पाबे मोर चेत हे ।
एही मोर बर पुरान अउ वेद हे ।
एला पढ़ सीखे हो मया आखर ढ़ाई ।
जेकर कोठी म धान भरे रथे ।
वो चिन्ता ले बाहिर एकदम रथे ।
चबंद खाथे कमाथे पहिरथे ।
सके ले बर पड़थे संगी पाईं ।
अपन संस्कृति अपन विचार के ।
खुद बनना हे हमला रखवार ।
धरके ठेंगा पोरिस मुड़ म पागा ।
हरना हावय जी सबके करवाई ।
Bhut achi rachna hain💐💐
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना...👌👌👌
ReplyDelete💯👌👌
ReplyDeleteBehot khub ����
ReplyDeleteअपन छत्तीसगढ़ी भाषा व कविता बहुत ही सुन्दर है
ReplyDelete✍️👌👌
ReplyDeleteBahut hi Sundar Kavita 👌👌💐
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