जिला-कांकेर(छत्तीसगढ़)
विधा-छंद मुक्त कविता
विषय-छत्तीसगढ़ के महापुरुष
अलंकार-श्लेष अलंकार
शीर्षक-गुरु घासीदास
छत्तीसगढ़ की माटी में जन्म लिया,
कुप्रथाओं का अंत किया।
लोगों को पंथ सतनाम दिया,
बालपन से ही हृदय में उनके
वैराग्य ने जन्म लिया।
जिन्होंने पशु प्रेम का सीख दिया,
छुआ-छूत को दूर किया।
मानव-मानव एक समान कह
आपसी भेद को दूर किया,
ऐसे थे गुरु घासीदास जिन्होंने
सत्य,अहिंसा,प्रेम का संदेश दिया।
-कु.गरिमा पोयाम
श्लेष अलंकार का प्रयोग-१.वैराग्य ने जन्म लिया इस पंक्ति में जन्म का तात्पर्य "जन्म" और नई भावना के उपजने दोनों से है।२.आपसी "भेद"को दूर किया में भेद का तात्पर्य जातिगत भेदभाव तथा ऊंच-नीच जैसे छुआछूत दोनों से है।
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