स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- छंदमुक्त कविता ( श्लेष अलंकार का प्रयोग)
शीर्षक -"छतीसगढ़ के महापुरुष "
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मद से भर जाते मेरे नयन
जब महापुरुषों का लेती हूँ नाम
मद से करती मैं उनको प्रणाम
हुए अनगिनत इस धरा पर
किस-किस का करूं बखान
फिर भी इंगित करती हूं
हर एक का विशेष काम
कबीर पंथ के संस्थापक
कबीर दास पहुँच गए
हर जन मानस तक
सुंदर से थे सुंदर लाल
काम था इनका बेमिसाल
गांधीजी का कर अनुसरण
मंदिर में हरिजनों को घुसाए
छत्तीसगढ़ के गांधी कहाए
छत्तीसगढ़ के प्यारे लाल
ठाकुर प्यारेलाल हैं कमाल
35 दिन तक किये हड़ताल
मजदूरों के दुख हर ,बने सहारा
गरीब कहते मसीहा हमारा
क्या खूब है खूब चंद बघेल
जंगल सत्याग्रह कर गए जेल
विदेशी चीजों का किया बहिष्कार
स्वदेशी का किया पुकार
इनकी हुई जय जयकार
सेठ शिवदास डागा जी
मजिस्ट्रेट का पद त्यागे जी
नित नए स्कूल खोलकर
बालिका शिक्षा किया मजबूत
ये हैं छत्तीसगढ़ के वीर सपूत
महंत लक्ष्मी नारायण दास
स्वाधीनता में लिए भाग
नमक का क़ानून तोड़ा
छ.ग.को डांडी से जोड़कर
गांधी जी का दिया साथ
वामन राव बली राम लाखे भाई
सहकरिक्ता की किये अगुवाई
को-आपरेटिव की स्थापना की
अंग्रेजों की खूब हुई खिंचाई
जनता इन्हें लोकप्रिय से नवाजी
सोनाखान की धरती पावन
सोना जैसे लाल मनभावन
वीरों के वीर है वीर नारायन
पुष्पा करती यश का गान
ऋणी रहेगा छतीसगढ़ महान
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श्लेष अलंकार-मद-हर्ष, गर्व
हर- प्रत्येक, कम करना ,हरना
लाल-पुत्र,एक नाम
खूब- ज्यादा, एक नाम
सोना- सोने जैसा प्रिय,स्थान का नाम
वीर- बहादुर, एक नाम
Bahut hi सुन्दर रचना..... Cg k वीर पुरूष jo ki स्वाधीनता के और अधिकार ke लिए लगे
ReplyDeleteHeart touching
ReplyDeleteGood
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