*निवास-बैरन-बाज़ार,रायपुर ।
*जिला--रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
*शीर्षक-""हमारा गाँव ""
*विधा---छ्न्द मुक्त (कविता)
÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷=÷
^^^^""हमारा गाँव ""^^^^
**********
नदिया किनारे, हमारा गाँव--रे ,
गूलर,अर्जुनी,वट वृक्ष,लगे पास--रे ।
नदिया किनारे,हमारा खेत-खार--रे ,
लगी फसलें,गन्ना,पपीता,सब्जियां-रे।
वर्षा ऋतु में,खेतों में,फसलों की क्यारी
किसानों की,होती वहाँ हलचल भारी ।
नदिया बनी,गाँव की गोरी का पनघट रे
नहाते,कपड़ा धोते, तैरते सहेलियां--रे।
तीज-त्यौहारों में,दिखाई देती रौनक रे,
क्या बच्चे-बूढ़े,क्या महिला-पुरुष में रे।
सार्वजनिक गणेश,दुर्गा पूजा में भीड़ रे,
दीयारी में,सुआ,राऊत-नाच,गौरा-,गौरी पूजा की,गूंज--रे ।
सरकारी योजना से,बना स्टाप डेम-रे,
गर्मी में,हुई पानी की समस्या दूर--रे।
पशुओं को मिलता पानी,भरपूर--रे ,
उनको नहलाते-धुलाते,किसान--रे।
पंचायती राज आया,गावों का सुधार रे,
साक्षरता,प्रौढ़शिक्षा व जागरुकता--रे।
सरकारी योजनायें,स्व-सहायता समूह और आँगनबाड़ी बाड़ी--रे,
स्वास्थ्य कार्यकर्ता,सामुदायिक भवन की बाड़ी--रे ।
गाँव-सुधार,पानी,गलियों की सफाई रे,
शौचालयों,चौपालों निर्माणों से,उत्कृष्टता दिलाई--रे ।
गाँव हमारा,है शहरों से,ज्यादा प्यारा रे,
पेड़-पौधे,शुद्ध प्राणवायु, भाईचारा--रे।
***********======***********
व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि हमारा गाँव में हुये सुधार से खुशहालियाँ व भाईचारा बढ़ा है और आत्मनिर्भरता भी ।
------------=÷÷÷÷=÷÷÷÷÷=÷------
स्वरचित प्रस्तुति-एच-एस-अरमो"अरमान"
No comments:
Post a Comment