Saturday, July 25, 2020

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि" की रचना:- गांव

रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
               बिलासपुर  छ. ग. 
               
शीर्षक -वही तो गाँव है |
               
गाँव तो गाँव  है |जहाँ  मिलता शीतल छाँव है |
जहाँ  अपनापन  और प्यार है | वही तो गाँव है |

जहाँ  पर होते बड़े बूढ़ो का जमघट , होती है |
पुरे गाँव समाज की बाते  और होती है|
रोज आपस में उनकी मुलाकाते |
जहाँ  अपनापन प्यार है |वही तो गाँव है |

बच्चों को प्यार संस्कार देता पूरा परिवार है |
बड़े बूढ़ो के होते छोटो को ना होता क़ोई भार  है |
जहाँ अपनापन प्यार है |वही  तो गाँव  है |

हंसी की गूंज से खिलखिलाता पूरा घर  है |
और शिकायतों की रोज बौछार  है |
जहाँ अपनापन  प्यार है | वही तो गाँव है |

सखियों  संग झूला और मड़ई और मेला |
आपस में मेला मिलाप ना क़ोई अकेला |
जहाँ  अपनापन  प्यार है |वही तो गाँव है |

सब्जी से शुरू होकर मायके ससुराल पर बाते खत्म होती है और जहाँ  हँसी  ख़ुशी के साथ दिन की शुरुवात होती है |
जहाँ  अपनापन  प्यार  है | वही तो गाँव है |

बसता  जहाँ  खुशियों का संसार है |
मिलता जहाँ केवल प्यार है |वही मेरे गाँवका घर परिवार है|
जहाँ  अपनापन  प्यार है | वही तो गाँव  है | 

भावर्थ _ गाँव की विशेषता का वर्णन |
रचनाकार  _ सावित्री यादव  "सावि"
               

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