रचनाकार - देवयानी शुक्ला
जिला - रायपुर,छ.ग.
शीर्षक - *साझेदारी*
विधा - कविता (मुक्त छंद)
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*साझेदारी*
पूछो जीवन!!!प्रश्न तुम्हारे
सारे उत्तर पाओगे ।
ये अनुभव से भरे नयन हैं
अश्रु भर न पाओगे ।
इन दो कर्मठ हथेलियों ने
अगणित पीड़ा चापी है ।
इन दो सतत् चपल पैरों ने
सारी वसुधा नापी है ।
तुम इठलाओ मुझे दिखाओ
अपने सब संभार
कर्मवीर के सम्मुख छोटा
ये सारा संसार
तुमने बरसाए थे मुझ पर कष्टों के जो शूल
जीवन रण में मुझे बनाया
उनने ही अनुकूल
मान भी लो हम सहयात्री हैं
सिक्के के दो पृष्ठ ।
साझेदारी से पा लेंगे
अपने सभी अभीष्ट ।
आओ चिर प्रतियोगी मेरे !!!
भूलें सब प्रतिद्वंद
आनंदित हो साथ में गाएँ
नेह के अनुपम छंद ।।
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