Wednesday, July 22, 2020

महासमुन्द से द्रोपती साहू"सरसिज" की कविता:-जीवन चक्र "परिवर्तन"

द्रोपती साहू "सरसिज"महासमुन्द, छत्तीसगढ़
        शीर्षक:जीवन चक्र"परिवर्तन"
             विधा-कविता(तुकांत)  
                    *******                      
समय की गति को कोई रोक नहीं पाया ।
चला गया व्यर्थ में वापस कभी न आया।।

सुख दुख का नाता ज़िन्दगी को खूब भाए।
दोनों का संग सदा एक आए तो दूजा जाए।।

कदम से कदम मिला के चलें सभी हैं अपने।
नेक राह पर चल कर पूरा कर लें हर सपनें।।

आएँ मुश्किलें कई फिर भी संयमवान होना।
क्रोध ईर्ष्या की अगन में ज़िन्दगी नहीं खोना।

आयु अन्न धन रंग रूप किसी का कब ठहरा।
व्यक्तित्व के विकास का अवसर यही सुनहरा।।

सुख दुख का फेर जीवन चक्र चलता रहेगा।
करो पुरुषार्थ कोई जय जयकार युग करेगा।।
                      *******
                 द्रोपती साहू "सरसिज"
                 महासमुन्द, छत्तीसगढ

1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...