स्थान- डोलेसरा, रायगढ़
विषय- हरेली पर्व
शीर्षक- आगे हरेली के तिहार
*आगे हरेली के तिहार*
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आगे हरेली के तिहार,होगे भुइँया के सिंगार।
लहर लहर लहरे खेती,आऊ हरिहर होंगे जमो कछार।
बादर घूमे धरती चूमे, होगे सुघर मेल।
निकालो जी गेड़ी संगी,खेलबो हमन खेल।
होंगे बरसा के फुहार,मिलगे गियाँ संगवारी यार।
रचक राचक गेड़ी चलगे,पहुंचे घर- घर द्वार।
चिखला माटी सबो सना गे,होंगे ठेलम ठेल।
संगी निकालव जी गेड़ी,खेलबो हमन खेल।
देवता धामी करे विहार,देवरास मा बहागे गोरस धार।
गुनिया टोनही पहुचगे,लेके जाड़ा के डार।।
बाजत हे मिसान तासा,भागे परेतिन चुड़ैल।
संगी निकालव जी गेड़ी,खेलबो हमन खेल।
अमावस के होंगे अंधियार,किसान गाये मेघ मल्हार।
पोगरात कोठा मा गरबा बैठे ,सेइतागे कोपर नांगर तूतार।
खा पी के मस्त रबो,चीला रोटी आऊ चकेल।
संगी निकालव जी गेड़ी,खेलबो हामु खेल।।
सजगे नारियर के बाजार,खेला होंगे जोरदार।
शरत बोली लगे है,बरवा जमो होंगे तियार।
चढ़े है धतूरा चंपा,पड़थे सांठी बेल।
संगी निकालव जी गेड़ी,खेलबो हामु खेल।
आगे हरेली के तिहार,बधाई करो जी स्वीकार।
हमर संस्कृति सबले सुघड़ ,जय छत्तीसगढ़ जय जुहार।
फुकडी भंवरा बाटी गोटी,जमो ला सखेल।
संगी निकालव जी गेड़ी,खेलबो हमन खेल।
मौलिक रचना
अजय पटनायक
बहुत सुग्घर तिहाड़ के गीत लिखे हावजी
ReplyDeletebahut bdhiya
ReplyDeleteजय हरेली
ReplyDeleteVery very nice
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