जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक ---धरती और किसान
व्याख्या ---कवि के द्वारा अपनी छत्तीसगढ़ महतारी पुत्र किसान की एवं धरती की महिमा का वर्णन किया गया है ।
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धरती और किसान
धरती की हरियाली देखो,देखो सावन महीना ।
किसान की खेती बाड़ी ,देखो उसका जीना ।
यहां लहलहा रहे फसल उसके, पेड़ गीत गा रहे ।
उसका गांव बहुत ही सुन्दर,नदी ताल बता रहे ।
आज है पर्व हरेली उसका,हल बैल धो मना रहा ।
आंगन में धूप दीप जला, श्रद्धा अपनी दिखा रहा ।
खेतों में भरा हुआ पानी, लगे उसका पसीना ।
घर में उसके अनेकों व्यंजन, बने बांट कर खा रहा ।
चीला अरिसा ठेठरी खुरमी,बरा भजिया से घर भा रहा ।
गोरइया पाठ की किया है पूजा, सुख समृद्धि कामना ।
गांव का देवता भइया किसान , मेरा तो है भाई मानना ।
हर पलउसके घर लक्ष्मी,दे रही उसे आशीष नगीना ।
बादल भी उसके आंगन में,आकर रिमझिम बरस रहा ।
उसके आंगन में घुमने को, सावन पुरवाई तरस रहा ।
रच रच बजती सुनाई दे रही, उसके गली में गेड़ी ।
छोटे बच्चे चढ़ उसमें घूम रहे, मचल मचल कर एड़ी ।
परछी आंगन घर उसके नाचे, सुख सुमत की हरिना ।
धरती मां की हरियाली देख, किसान का मन हर्षित है ।
उसके हरे भरे पन से, दुनियां को मिलता अमृत है ।
लग रहा खेतों में उतरा चांद, सूरज भी यहां घूम रहे ।
गांव की आपसी प्रेम भाईचारा, आज नाच और झूम रहे ।
खुशियां तो सबके मन बसते, वर्णन करते बहुत कठिना ।
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