Thursday, July 23, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- सफर

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
शीर्षक -"जिंदगी का सफ़र"
विधा- छंदमुक्त कविता
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सफ़र ये सुहाना 
लगे जिंदगी का 
जब एहसास हो
तुम्हारे करीबी का  
कभी न सोचा मैंने
बिन तेरे सफ़र करूँ
सपने में भी नहीं सोंचा
कि बिन तेरे मैं रहूँ
लड़खड़ाने लगे जब 
मेरे  यह  कदम 
थाम लेना मुझको
तुम बढ़कर हमदम 
अकेले कभी भी
चल ना सकूँगी 
मेरे हमराही बड़ी
लंबी है यह डगर
कठिन पल भी 
यूं गुजर जाते हैं 
जब मुस्कुरा कर 
आप ये कहते हैं 
चिंता मत करो 
सब ठीक हो जाएगा
एक सुकून सा 
मिल जाता है मुझे  
जब कांधे पर 
रखती हूं तेरे सर

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