रायगढ़, छत्तीसगढ़
विषय-सफर पर आधारित कविता
विधा-मुक्त छंद
शीर्षक-हमसफ़र मेरे
इस हंसी सफर के हमसफ़र मेरे
तेरे साथ ये जीवन गुलजार है
मेरे हर कदम के साथ तेरे कदमों
की आहट ही मेरे जीवन का सार है
जब आये तुम मेरे साथ इस सफ़र पे
तो जीवन ख़ुशनुमा एहसास बन गई
चुन के कांटो को राहों से फूलों को बिछा
अपने प्यार का दीदार करा गई
अभी तो सफ़र के चंद वर्ष ही गुजरे हैं
एक लंबा फासला तय करना है
आने वाले जन्म - जन्मो तक
तेरे साथ ही सफ़र तय करना है
इस हंसी सफर के हमसफ़र मेरे
जब आंखों से मेरे कभी बहते हैं अश्क़
तेरे आंखों में नमी का एहसास होता है
मेरी आती -जाती हर साँस का
तेरे पास हिसाब होता है।
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