जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक --- ज्ञान
व्याख्या ---कवि के द्वारा ज्ञान देने उसमें आने वाली कठिनाईयों उसके पश्चात स्वीकार करना ज्ञान क्या है ज्ञान के क्षेत्र में विश्व में अपनी क्या स्थिति है का संक्षिप्त वर्णन किया गया है ।
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ज्ञान
जो ज्ञान मेरे पास है , बांटते आ रहा हूं ।
अज्ञानता मिटता ज्ञान से, जानते जा रहा हूं ।
ज्ञान लेने वालों की ,कमी मैंने पाया है ।
इनकी संख्या बढ़े , कदम मैंने उठाया है ।
सफल है मेरा मार्ग ,कदम बढ़ाते जा रहा हूं ।
पहले तो मेरी खिल्ली,सब उड़ा रहे थे ।
बाद सलाह मशविरा ,कदम बढ़ा रहे थे ।
उनका जो भय था मन से, मिटाते जा रहा हूं ।
अब सीखने की ललक, उनमें जाग उठी है ।
नहीं सीखते कहते लोग,ये बात झूठी है ।
ज्ञान का आइना सबको, दिखाते जा रहा हूं ।
ज्ञान का सूरज उगने ,लगा सबके मन ।
दिख रहा प्रकाश उसका, समुचित जीवन में ।
नाम मात्र जोखिम, उठाते जा रहा हूं ।
ज्ञान का महत्व लोग ,जानने लगे हैं ।
ज्ञान से सब कुछ है ,लोग मानने लगे हैं ।
यही बात बार- बार, दुहराते जा रहा हूं ।
किसी विषय को पूर्ण रूप, समझना ज्ञान है ।
उपयोग और अनुभव करना, पहचान है ।
ज्ञान सबसे बहूमूल्य लुटाते जा रहा हूं ।
ज्ञान में अपना देश, सबसे है महान ।
विश्व गुरु कहलाते हम यह है पहचान ।
जो मुझसे सीखा पढ़ाते जा रहा हूं ।
ज्ञान एक यज्ञ है आओ सम्पन्न करे ।
ज्ञान एक तीर्थ है आओ भ्रमण करें ।
ज्ञान से सारी खुशियां, पाते जा रहा हूं ।
गिरधारी लाल चौहान
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