स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
शीर्षक -"ज्ञान"
विधा- छंदमुक्त कविता
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(1)
ज्ञान का प्रकाश फैला जहाँ
जगमग रोशन हुआ वहाँ
कर न सकें कोई चोरी इसे
निरंतर बढ़ाये मांन सदा।
(2)
समस्याएँ आती हैं पर
परेशान न कर पातीं
ज्ञान सर उठाता है जहाँ
समस्याएं हार मान जाती।
(3)
चाहे आइंस्टीन हो या बुद्ध
ज्ञान का ही है युद्ध
एक ने सुविधा दिया
दूजे ने आत्मा किया शुद्ध।
(4)
ज्ञान से ही विज्ञान बढ़ा
ज्ञान से ही आत्मज्ञान हुआ
ज्ञान दीप जब-जब जला
तब- तब इंसान महान हुआ।
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