रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- जीवन रंगीन किताब।
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जियो अगर जीवन सिद्दत से,
जीवन रंगीन किताब है।
गम के बादल जरूर हैं मगर,
खुशियों की बरसात भी बेहिसाब है।
जीवन की किताबों में,
सुसज्जित रंगीन चित्राहार।
साहित्य व प्रीत भाव के,
भरे जीवन में चमत्कार।
विज्ञान के सिद्धांतों से,
है जीवन में राह कई।
उनको अपनाकर जीवन में,
चुन लेते हैं राह सही।
है जीवन में गणित के मानिंद,
कईयों अनसुलझे सवाल।
हल करते सारे तेल निकलते,
उठते मन में कई बवाल।
है एक तृतीय भाषा सी,
है समझ से जो परे ।
बस परीक्षा दिलाने जिसे,
हर प्रश्न को रटे पड़े।
फिर भी कहूं यह जीवन की किताब,
पुनि - पुनि पढ़ने को नहीं मिलती।
ज्यों मुरझाए फूल अगर तो,
लाखों कोशिशों से भी नहीं खिलती।
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