तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, जिला_कोरिया
छत्तीसगढ़।
शीर्षक_अस्तित्व
अस्तित्व
चाहे मैं कुछ भी कर लूं
पर रह न पाऊं तुम्हारे बिना
चाहे साथ हों मेरे
ये दौलत, ये शोहरत सारे
पर कुछ भी नहीं
ये मेरे अस्तित्व बिना
जैसे कहते हैं ना
जान है तो जहान है
वैसे ही मेरा अस्तित्व ही
मेरा प्राण है
जैसे शोभायमान होता है
अंगूठी में नगीना
वैसे ही शोभित होता है
अस्तित्व के संग जीना
ये बात भूलना कभी ना
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